6 विधायकों के दल-बदल मामले में लंबी सुनवाई के बाद आज विधानसभा न्यायाधिकरण फैसला सुनाएगा. चुनावी मौसम है, ऐसे में इस फैसले का सियासी असर होना तय है. हालांकि फैसले से सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उधर निर्णय खिलाफ में जाने की स्थित में जेवीएम हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है.
बाबूलाल ने दायर की थी याचिका
दरअसल 2014 में झारखंड विकास मोर्चा के सिंबल पर जीतकर आए छह विधायकों ने चुनाव के ठीक बाद बीजेपी का दामन थाम लिया था. इसके खिलाफ जेवीएम सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने विधानसभा न्यायाधिकरण में याचिका दायर कर विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की. हालांकि विधायकों ने इसे दल- बदल नहीं जेवीएम का बीजेपी में विलय करार देते हुए अपनी दलील पेश की.
चार से ज्यादा चली सुनवाई
12 फरवरी 2015 से विधानसभा न्यायाधिकरण में इस पर सुनवाई शुरू हुई. 95 से ज्यादा सुनवाई में 52 लोगों ने गवाही दी. इसके बाद 12 दिसंबर 2018 को सुनवाई पूरी कर स्पीकर ने फैसला सुरक्षित रख लिया. अब चार साल से अधिक समय बाद इस मामले पर फैसले आने वाला है. विपक्ष को लंबे वक्त को लेकर मलाल है. वहीं सत्ता पक्ष को विधायकों के पक्ष में फैसला आने का भरोसा है.



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