हुनर के हाथों को अगर सुई-धागे का सहारा मिल जाए तो तकदीर की चादर में रंग कैसे भरे जाते है, इसकी मिसाल हैं ‘ फूलो-झानों सक्षम आजीविका सखी मंडल’ की महिलाएं, जो गोड्डा के अदाणी स्किल डेवलपमेंट सेंटर में चल रहे ‘सक्षम सिलाई सेंटर’ में स्कूल ड्रेस तैयार करने के काम में जुटी हैं। कुछ साल पहले सिलाई-कढ़ाई सीखने की चाहत रखने वाली चंद महिलाओं के लिए अदाणी स्किल डेवलपमेंट सेंटर ने एक सिलाई सेंटर खोला। महिलाएं जुड़ती गई और कारवां बनता गया। आज चंद महिलाओं से शुरू हुआ सफर सैंकड़ों-हजारों की संख्या पार चुका है। जब हुनमंद हाथों की संख्या इतनी बड़ी हुई तो जिला प्रशासन ने इनकी आजीविका निर्धारित करने का निर्णय लिया । जिला प्रशासन ने इन ‘सक्षम’ महिलाओं को न सिर्फ विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों से जोड़ा बल्कि ‘फूलो-झानो महिला सक्षम महिला समिति’ नाम से स्वयं सहायता समूह बनाकर इन्हें स्वरोजगार का एक ऐसा अनूठा उपहार दिया जिनसे इनकी जिंदगी ही बदल गई। जिले की 1160 महिलाओं को 114 स्वयं सहायता समूह बना कर जिला प्रशासन की तरफ से इन्हें सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए स्कूल ड्रेस तैयार करने का काम दिया गया है। उपायुक्त किरण कुमारी पासी की इस शानदार पहल की सराहना मुख्यमंत्री रघुवर दास की कर चुके हैं।
अगर आय की बात करें तो ‘फूलो-झानो महिला सक्षम महिला समिति’ से जुड़ी महिलाएं आज 4 से 5 हजार रूपये प्रतिमाह कमा लेती है। दरअसल इन महिलाओं को पैंट और शर्ट का एक जोड़ा तैयार करने पर तकरीबन 58 रुपये मिलते हैं, जिसमें कटिंग, सिलाई, बटन लगाना, स्त्री करना और पैकेजिंग आदि शामिल है। इसी तरह लड़कियों के ड्रेस तैयार करने का भी दर निर्धारित है। ‘फूलो-झानो महिला सक्षम महिला समिति’ से जुड़ी शांता देवी कहती हैं कि “सिलाई सीख कर अब इन्हें स्वरोजगार का जो जरिया मिला है इससे इनकी जिंदगी में बड़ा बदलाब आया है।“ शांता कहती हैं “घर की आय बढ़ी है तो अब ये अपने बच्चे को शहर के नामी स्कूल में पढ़ा रही हैं।“
आज सैंकड़ों की संख्या में ये महिलाएं अदाणी स्किल डेवलपमेंट सेंटर के ‘सक्षम सिलाई सेंटर’ में स्कूली बच्चों के ड्रेस तैयार करने में जुटी हैं। मोतिया में शुरू हुए पहले सिलाई सेंटर से बढ़ कर इन सेंटरों की संख्या अब दर्जन से ज्यादा हो चुकी हैं। ये सेंटर डुमरिया, रंगनिया, बसंतपुर, सर्वा, बहोरिया आदि गांवों में मौजूद हैं।
सबसे बड़ी बात तो ये भी है कि जिस तरह की सिलाई के लिए भारी-भरकम इंडस्ट्रीयल मशीनों की आवश्यकता होती है उसे ये महिलाएं अब तक घरेलू मशीनों कर रहीं हैं, यहां तक की काज-बटन आदि का काम भी हाथों से किया जा रहा है। महिलाओं की लगन और उनके जज्बे को देखते हुए जिला प्रशासन की पहल पर स्वयं सहायता समूह की इन महिलाओं के लिए अदाणी फाउंडेशन द्वारा सिकटिया में एक बड़ा सेंटर तैयार किया जा रहा है जहां बड़ी संख्या में इंडस्ट्रीयल सिलाई मशीन लगाए जाने की योजना है। इस सेंटर पर काज-बटन आदि कामों के लिए भी खास मशीन लगाए जा रहे है। अदाणी फाउंडेशन के अधिकारियों का कहना है कि यह सेंटर जल्द ही शुरू होने वाला है। इस सेंटर के शुरू होने से न सिर्फ उत्पादन दर बढ़ेगा बल्कि महिलाओं के आय में भी बढ़त होगी।



Post A Comment:
0 comments so far,add yours