सूबे के अतिपिछड़े 19 जिलों की तकदीर बदलेगी. केंद्र द्वारा चिह्नित इन जिलों में विकास योजनाओं का एक नया दौरा शुरु होगा, जिसमें सर्वांगिण विकास की तस्वीर बनेगी. शुक्रवार को रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में इस बात को लेकर खाका खींचा गया. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौवा, नीति आयोग के पदाधिकारियों के अलावा राज्य सरकार के मुख्य सचिव समेत कई अधिकारी और सबंधित जिलों के डीसी-एसपी मौजूद रहे.
केन्द्र ने देश के 115 जिलों को अतिपिछड़ा जिले के रुप में चिह्नित किया है. इनमें से 19 जिले झारखंड के हैं. इन 19 जिलों में से 16 घोर नक्सल प्रभावित हैं. प्रोजेक्ट भवन में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई हाई लेवल बैठक मीटिंग में इन जिलों के डीसी ने योजना के क्रियान्वयन को लेकर मुख्यमंत्री और केंद्रीय अधिकारियों के सामने प्रजेंटेशन दिया, वहीं मुख्यमंत्री ने भी आवश्यक दिशा निर्देश दिये.
बैठक में विकास को लेकर जो खाका खींचा गया, उसमें शिक्षा और स्वास्थ्य पर ज्यादा जोर दिया गया. मुख्यमंत्री ने जहां शिक्षकों और एएनएम - पारा मेडिकल कर्मियों की बहाली को लेकर अधिकारियों को दिशा निर्देश दिया, वहीं इन क्षेत्रों में संचार, सुरक्षा और रोजगार जैसी समस्याओं को लेकर भी योजना बनाने की बात कही गयी. केंद्रीय गृह सचिव ने बैठक पर संतुष्टी जताते हुए कहा कि अब इन जिलों में योजनाओं को जमीन पर उतारने में देरी नहीं होगी.
गौरतलब है कि देश के अतिपिछड़े 115 जिलों में झारखंड का रांची, हजारीबाग , सिमडेगा, गिरिडीह , पलामू ,चतरा जैसे जिले शामिल हैं. इन जिलों में चलने वाले विकास कार्यों की मॉनिटरिंग पीएमओ से होगा. ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि विकास योजनाएं यहां जमीन पर सही तरीके से उतरेंगी और इन पिछड़े



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