अपने खुशनुमा मौसम के लिए देश और दुनिया में विख्यात रांची लगातार गर्म हो रही है. इतना ही नहीं, झारखंड के अन्य हिस्से की तरह रांची ने भी अब धीरे-धीरे कम बारिश वाले क्षेत्र की राह पकड़ ली है. मौसम केंद्र रांची के दो वैज्ञानिकों के शोध इस ओर इशारा करते हैं कि हर तीन दशक में रांची का तापमान एक डिग्री सेल्सियस बढ़ जाने के पैटर्न के बाद अब सावधान हो जाने की जरूरत है.

आज विश्व पृथ्वी दिवस है. दुनिया भर में पर्यावरण और धरती को बचाने के संकल्प के बीच झारखंड और खासकर राजधानी रांची के मौसम में हो रहे बदलाव को लेकर मौसम केंद्र रांची का एक रिसर्च यह बतलाता है कि रांची का तापमान हर दस वर्ष में .32 डिग्री सेल्सियस बढ़ रहा है. पिछले 116 वर्ष का आंकड़ा बताता है कि झारखंड और रांची में जहां बारिश लगातार घट रही है तो ग्लोबल वार्मिंग जैसा मौसम की चरम स्थिति बन रही है.

पृथ्वी दिवस को लेकर आज रांची सहित राज्यभर में कई कार्यक्रम हुए. जिसमें देश और दुनिया के समक्ष बढ़ते तापमान को सबसे बड़ा खतरा बताते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि कई हिस्सों में धरती का तापमान पहले से ही बढ़ा हुआ है. झारखंड और रांची के साथ साथ दुनिया भर में एक अभियान चलाने की जरूरत है.

इस वर्ष पूरे विश्व में पृथ्वी दिवस पॉलिथिन मुक्त दुनिया बनाने के संकल्प को साथ मनाया जा रहा है. पर दुनिया के साथ साथ राजधानी रांची का बढ़ता तापमान हमें सचेत करता है कि जब कभी खुशनुमा मौसम के चलते लोगों के बीच आकर्षण का केन्द्र रही रांची का हाल यह है तो सोचिए समस्या कितनी विकट हैं.
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