गोमिया उपचुनाव में 13 प्रत्याशी मैदान में हैं. लेकिन मुख्य मुकाबला बीजेपी, जेएमएम और आजसू के बीच है. बीजेपी की तमाम कोशिशों के बावजूद यहां आजसू ने अपने उम्मीदवार को मैदान में उतारा.
बीजेपी प्रत्याशी माधव लाल सिंह सियासत के पुराने खिलाड़ी हैं. वे चार बार गोमिया से विधायक रह चुके हैं. दो बार निर्दलीय जबकि एक बार कांग्रेस की टिकट पर विधानसभा पहुंचे. 2014 के चुनाव में बीजेपी का दामन थामकर चुनाव लड़ा. लेकिन चुनाव हार गये. पूजा-पाठ में विश्वास रखने वाले माधव लाल गोमिया के पाड़म के रहने वाले हैं. उन्होंने छात्र नेता के रूप में राजनीति की शुरुआत की.
आजसू प्रत्याशी डॉ लंबोदर महतो झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रह चुके हैं. वीआरएस लेकर उन्होंने उपचुनाव लड़ा. लंबोदर महतो मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के रह चुके हैं और अपने पद से रिजाइन देकर उपचुनाव में किस्मत आजमा रहे हैं. गोमिया के कसमार के रहने वाले लंबोदर महतो पहले से ही अपनी सियासी जमीन तैयार करने में जुटे थे. उन्होंने मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी की मदद से गोमिया में कई योजनाओं को धरातल पर उतारा.
जेएमएम प्रत्याशी बबिता देवी उपचुनाव से पहले तक घरेलू महिला थीं. वो जेएमएम के पूर्व विधायक योगेन्द्र महतो की पत्नी हैं. योगेन्द्र महतो की सियासी जमीन को आगे बढ़ाने के लिए जेएमएम ने उन्हें मैदान में उतारा है. 2014 के चुनाव में आजसू से पाला बदलकर योगेन्द्र महतो जेएमएम में आ गये थे और जीत दर्ज कराई थी. कोयला चोरी के मामले में सजा पाने के कारण उनकी विधायकी चली गई.



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