झारखंड के गोमिया विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव हो रहा है. लेकिन यहां विकास की अधूरी कहानी नजर आती है. क्षेत्र के लोग पेयजल की समस्या से खासे परेशान हैं. औद्योगिक इलाका होने के बावजूद यहां बेतहाशा बेरोजगारी है.

झारखंड राज्य जब नहीं बना था तब भी लोग गोमिया का नाम जानते थे. यह बारुद कारखाना के लिए प्रसिद्ध रहा है. इसके अलावा सीसीएल की इकाई भी यहां है. इसी विधानसभा क्षेत्र में तेनुघाट डैम भी है. लेकिन यह क्षेत्र पानी की समस्या से जुझ रहा है. यहां के लोग पेयजल की समस्या के लिए सभी पार्टियों को जिम्मेवार मानते हैं.

उपचुनाव है तो यहां के स्थानीय मुद्दे काफी मायने रख रहे हैं. बेरोजगारी के कारण युवाओं को पलायन करना पड़ता है. गोमिया के रामबाबू के दोनों बेटे काम की तलाश में बाहर रहे हैं. सड़क किनारे गुमटी पर दुकान चलाकर संजय अग्रवाल वर्षों से अपना और अपने परिवार का पेट भर रहे हैं. रोजगार के अवसर नहीं मिले तो जीवन ऐसे ही काट रहे हैं.

गोमिया विधानसभा क्षेत्र की आबादी लगभग साढ़े चार लाख है. यहां 2 लाख 72 हजार मतदाता हैं. इस उपचुनाव में 13 प्रत्याशी भाग्य आजमा रहे हैं. लेकिन मुख्य मुकाबला झारखंड मुक्ति मोर्चा,भारतीय जनता पार्टी और आजसू के बीच ही है. पिछले चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के हिस्से में सीट गई थी. योगेद्र महतो की विधायकी रद्द के कारण यहां उपचुनाव हो रहा है. उनकी पत्नी बबीता देवी पति की विरासत संभालने की कोशिश कर रही हैं.



झारखंड मुक्ति मोर्चा की बबीता देवी को विपक्ष का समर्थन हासिल है. इस विधानसभा का दुर्भाग्य है कि यहां का कोई विधायक पेयजल जैसी समस्या का समाधान नहीं निकाल पाया. सबने जनता को ठगा है. स्वास्थ्य सुविधा,उच्च शिक्षा, बिजली आपूर्ति जैसी समस्याएं भी हैं. चमचमाती सड़क विकास का आइना हो सकती हैं. लेकिन दर्द और भी कई हैं.

भाजपा की ओर से माधवलाल सिंह एक बार फिर भाग्य आजमा रहे हैं. पूरी पार्टी यहां ताकत झोंक रखी है. सीएम रघुवर दास ने यहां तीन दिन जमकर चुनाव प्रचार किया. कार्यकर्ताओं को मोटिवेट किया. सत्ता पक्ष के लिए यह प्रतिष्ठा की सीट बन गई है. भाजपा के सामने उसका छोटा भाई आजसू भी खड़ा हो गया है. समीकरण के हिसाब से भाजपा ने गैर महतो को प्रत्याशी बनाया है. अब देखना होगा कि यहां की जनता किसे डेढ़ साल के लिए अपना विधायक चुनती है.
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