झारखंड की सीमा यानि ओडिशा तक पहुंचकर मानसून झारखंड के किसानों को लंबा इंतजार करा रहा है. सामान्यत 10 जून को झारखंड में दस्तक देकर किसानों के चेहरे पर मुस्कान ला देने वाला मानसून इस बार हमारे अन्नदाता को इंतजार करा रहा है.
झारखंड की पथरीली जमीन को भी अपनी मेहनत से हरा भरा करनेवाले किसानों के चेहरे से मुस्कान गायब हैं. मानसून पूर्व की अच्छी बारिश से उत्साहित किसानों ने नर्म पड़ी जमीन को जोतकर धान की खेती के लिए पूरी तरह तैयार कर रखा था. पर केरल में समय पर दस्तक देने वाला मॉनसून झारखंड पहुंचते-पहुंचते लेट होता चला गया. इतना लेट कि अब किसानों को लगने लगा है कि कहीं इस वर्ष मानसून धोखा न दे दे, और खेत की जुताई खर्च और मेहनत पानी नहीं होने के चलते बर्बाद न हो जाए.
तो वहीं मौसम केन्द्र की ओर से भी मानसून को लेकर कोई अच्छी खबर नहीं मिलती दिख रही. वरीय मौसम पूर्वानुमान वैज्ञानिक की मानें तो अभी झारखंड में मानसून के प्रवेश करने में ही एक सप्ताह तक का समय लग सकता है. ऐसे में पूरे झारखंड को मानसूनी बारिश के लिए और लंबा इंतजार करना होगा. मौसम वैज्ञानिक के अनुसार मॉनसून के कमजोर पड़ने और उसके आगे बढने की धीमी चाल के चलते यह सब हो रहा है.
झारखंड में धान की खेती मुख्य फसल है और करीब 70 से 80 फिसदी खेती पूरी तरह वर्षा जल पर ही आधारित हैं ऐसे में मानसून के देर से दस्तक देने के चलते किसान तो परेशान हैं ही, वहीं देर से खेती के चलते उपज में गिरावट की भी संभावना हर दिन बढती जा रही है.



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