झाविमो के सिंबल पर विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भाजपा में शामिल छह विधायकों पर दल बदल का मामला चल रहा है. शुक्रवार को विधानसभा न्यायाधिकरण में राज्य के कृषि मंत्री एवं दलबदल के आरोपी रणधीर सिंह तथा आवास बोर्ड के अध्यक्ष जानकी यादव ने गवाही दी, और कहा कि झारखंड विकास मोर्चा का भाजपा में विलय पूरी तरह वैधानिक था और राज्यहित में लिया गया फैसला था.
गवाही के दौरान रणधीर सिंह और जानकी यादव ने कहा कि दल में कोई नियम संविधान नहीं चल रहा था. दोनों गवाहों ने कहा कि बाबूलाल मरांडी ने खुद जीते हुए विधायकों के साथ बैठक कर यह कहा था कि भाजपा से विलय का प्रस्ताव मिल रहा है पर प्रदीप यादव की वजह से वह 8 फरवरी 2015 की उस बैठक में शामिल नहीं हुए जिसमें झाविमो का भाजपा में विलय होने का प्रस्ताव पारित हुआ. गवाही देने आए दोनों नेताओं ने प्रकाश राम की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह भी बैठक में आनेवाले थे पर समय पर नहीं पहुंच सकें नहीं तो 8 विधायकों में से 7 विधायक भाजपा में शामिल हो जाते.
वादी पक्ष के वकील ने गवाही के दौरान कहा कि सत्ता लोभ में उन्होंने पार्टी संविधान को ताक पर रखकर भाजपा में शामिल हो गए हैं और पूरा मामला दल बदल के अंदर आता है. 14 जुलाई 2017 से न्यायाधिकरण में शुरु हुई सुनवाई में कुल 53 गवाहों ने गवाही दी है और अब अगली तिथि से वादी पक्ष पूरे मामले में बहस करेंगे.
सुनवाई की अगली तिथि बाद में तय की जाएगी वादी पक्ष के अधिवक्ता ने न्यायाधिकरण से बहस प्रतिदिन के आधार पर करने का आग्रह किया.
'क्या है पूरा मामला'
झारखंड विधानसभा चुनाव के बाद बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा के टिकट पर चुने गए छह विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे. ऐसे में इन विधायकों की सदस्यता को रद्द करने को लेकर जेवीएम ने स्पीकर के यहां केस किया है, जिसकी सुनवाई चल रही है.



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