झारखंड की रघुवर सरकार गांवों के विकास के लिए विकास समिति बनाने जा रही है. इसे पांच लाख रुपये की योजना स्वीकृत करने का अधिकार होगा. लेकिन इसके तकनीकी पक्ष को इंकार नहीं किया जा रहा है. इस योजना पर सरकार का बड़ा खजाना खर्च होगा.
पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा ने इसी समिति पर सरकार को तमाम तकनीकी पक्ष का अध्ययन करने का सुझाव दिया है वहीं विपक्ष आलोचना कर रहा है. भाजपा में भी इसको लेकर मत भिन्नता है.भाजपा के ही कई लोग ग्राम विकास समिति पर सवाल खड़ा कर रहे हैं.अब देखना होगा कि इसे सरकार किस तरह लागू करती है.
झारखंड में रघुवर सरकार ने गांव के विकास के लिए स्थानीय स्तर पर समिति बनाने का निर्णय लिया है.ग्रामीण विकास समिति उन क्षेत्रों के लिए बन रही हैं जहां आदिवासी नहीं हैं या कम हैं . जिन गांवों में आदिवासी समुदाय के लोग अधिक हैं वहां आदिवासी विकास समिति का गठन हो रहा है. इसमें 35 साल से कम के लोगों को रखा जाएगा. गांव वालों को ही समिति का अध्यक्ष चुनना होगा.
नीति आयोग की बैठक में भी मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इसका उल्लेख किया . भाजपा के लोग इसे विकास के लिए एक नई सोच मानते हैं . झारखंड में कई क्षेत्र काफी पिछड़े हैं. इनका विकास अव्यवस्थित तरीके से हुआ है. इस योजना के पीछे गांव की आधारभूत संरचना का विकास किया जाना है. योजना के चयन में ग्रामीणों की पसंद ही प्रमुख होगी. उन्हें ही योजनाओं का सूत्रण करना है. राज्य सरकार सीधे समिति के बैंक खाता में पैसा देगी. कोई बिचौलिया नहीं होगा.



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