एक बार फिर कांग्रेस के अंदर गुटबाजी तेज हो गई है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ अजय के खिलाफ सुबोधकांत सहाय सहित कई नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है. बढ़ते विवाद के बीच मामला दिल्ली दरबार तक पहुंच चुका है. ऐसे में यह अंदरुनी कलह कांग्रेस के मिशन 2019 को क्षति पहुंचा सकता है.
झारखंड प्रदेश कांग्रेस में अंदरुनी कलह किसी से छिपी हुई नहीं है. सुखदेव भगत के प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटने के बाद यह उम्मीद की जाने लगी थी कि डॉ अजय कुमार पार्टी के अंदर गुटबाजी को खत्म करने में सफल होंगे. मगर ऐसा हो नहीं सका और पार्टी के कई बड़े नेता उन्ही से इन दिनों खफा हैं. सुबोधकांत सहाय समेत कई बड़े कांग्रेस नेताओं के नाराजगी का मुख्य वजह डॉ अजय के कार्यशैली को लेकर है. नाराज कांग्रेस नेताओं का मानना है कि प्रभारी आरपीएन सिंह और डॉ अजय मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं. पार्टी के अंदर बड़े नेताओं की उपेक्षा की जाती है और अन्य दलों के लोगों को पार्टी में लाकर बड़ी जिम्मेवारी दे दी जाती है.
पार्टी नेताओं के बीच नाराजगी का आलम यह है कि पिछले दिनों दिल्ली में प्रभारी आरपीएन सिंह के द्वारा बुलाई गई बैठक में सुबोधकांत सहाय, के एन त्रिपाठी समेत कई नेताओं ने उस पार्टी में शामिल होना उचित नहीं समझा. प्रभारी आरपीएन सिंह के कड़े तेवर ने आग में घी का काम किया. जिसके विरोध में सुबोधकांत सहाय ने असंतुष्ट नेताओं के साथ दिल्ली में अशोक गहलोत के समक्ष शिकायत दर्ज कराया. इधर पार्टी के अंदर बड़े नेताओं के बीच चल रहे गुटबाजी से पार्टी नेता और कार्यकर्ताओ की मुश्किलें बढा दी है कि वे जायें तो तो जायें कहां.
डॉ अजय को प्रदेश कांग्रेस का कमान थामे 6 महीने से अधिक हो चुके हैं. शुरु में तो सबकुछ ठीक-ठाक रहा. मगर हाल के दिनों में जैसे ही संगठन के अंदर बदलाव होने शुरु हुए विरोधियों के तेवर भी आक्रामक हो गए हैं. जाहिर तौर पर पार्टी ने अभी 2019 की तैयारी शुरु ही की है कि इसी बीच अंदरुनी कलह सतह पर आना पार्टी के लिए नुकसानदेह नहीं तो और क्या होगा.



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