भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल-2017 के विरोध में संयुक्त विपक्ष के बंद का पूरे सूबे में मिला-जुला असर देखने को मिला. पुलिस मुख्यालय के मुताबिक, बंद के दौरान पूरे सूबे में ढाई हजार से ज्यादा समर्थकों को हिरासत में लिया गया. हालांकि इस दौरान कहीं से कोई उपद्रव की खबर नहीं आई.

रांची में सैकड़ों नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन सड़क पर उतरे और अलबर्ट एक्का चौक पर प्रदर्शन किया. यहां से उन्हें हिरासत में लेकर मोरहाबादी स्थित कैंप जेल ले जाया गया. इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार पर तानाशाही करने का आरोप लगाया. इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री व जेवीएम सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी अपने पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ डिबडीह स्थित पार्टी कार्यालय से रैली निकालते हुए सुजाता चौक पहुंचे. इस दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस नेता सुबोधकांत सहाय भी उनके साथ थे. सुजाता चौक पर सभी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया.

रांची के अलबर्ट एक्का चौक पर प्रदर्शन कर रहे भाकपा माले के राज्य सचिव जनार्दन प्रसाद, विधायक विनोद सिंह और मजदूर नेता शुभेंदू सेन को भी हिरासत में लिया गया. इनके अलावा पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता केएन त्रिपाठी, सुखदेव भगत, आलमगीर आलम और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार को हिरासत में लिया गया. कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि राज्य सरकार को हर हाल में भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक को वापस लेना होगा.

धनबाद के निरसा में विधायक अरूप चट्टर्जी की अगुवाई में बंद समर्थकों ने एनएच-2 को जाम कर दिया. बंद के चलते जीटी रोड पर भी परिचालन प्रभावित हुई. देवघर में प्रदर्शन के दौरान पूर्व मंत्री सुरेश पासवान, पूर्व सांसद फुरकान अंसारी और विधायक बादल पत्रलेख को हिरासत में लिया गया. साहेबगंज में बंद समर्थकों ने ट्रेन परिचालन ठप कराने की कोशिश की, जिन्हें प्रशासन मौके से हटा दिया.
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