देवघर के देवीपुर में निर्माणाधीन एम्स गोड्डा सीट के लिए बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया है. एनडीए हो या महागठबंधन, इसकी क्रेडिट लेने में जुटा हुआ है. महागठबंधन प्रत्याशी प्रदीप यादव का कहना है कि एम्स से जुड़ी फाइल पर मनमोहन सरकार में ही स्वीकृति दे दी गई थी. लेकिन केन्द्र और राज्य की बीजेपी सरकार को चुनाव के समय में इसकी याद आई. आनन-फानन में शिलान्यास कर बाउंड्री की जा रही है. जबकि अबतक लोगों को यहां इलाज मिलनी चाहिए. इस देरी के बीजेपी को जवाब देना चाहिए.
बीजेपी प्रत्याशी निशिकांत दुबे का कहना है कि देवघर एम्स के लिए मोदी और रघुवर सरकार जिम्मेवार हैं. यूपीए का इसमें कोई योगदान नहीं है. बतौर निशिकांत महागठबंधन के प्रत्याशी हार के डर से बेतुका बयान दे रहे हैं. उनकी जमानत जब्त होने वाली है. बीजेपी प्रत्याशी के मुताबिक देवघर एम्स 2022 तक बनकर तैयार हो जाएगा. हालांकि ओपीडी और सौ सीट पर पढ़ाई इसी साल से शुरू हो जाएगी.
गौरतलब है कि 26 मई 2018 को धनबाद के सिंदरी से पीएम मोदी ने देवघर एम्स का शिलान्यास किया था. 913.42 करोड़ की लागत से इसका निर्माण देवीपुर में 236 एकड़ में जारी है. यहां एम्स बन जाने से देवघर के अलावा बिहार के बांका, भागलपुर समेत बंगाल के आस- पास के जिलों के लोगों को फायदा होगा.



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