प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सराईकेला मॉब लिंचिंग का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि सदन में ऐसा कहा गया कि झारखंड माॅब लिंचिंग और माॅब वायलेंस का केंद्र बन गया है. हम सबको युवक की मौत का दुख है. इस मामले के दोषियों को कठोर सजा मिलनी चाहिए. लेकिन, क्या पूरे झारखंड को बदनाम करना सही है.

हिंसा की घटनाओं के लिए एक मापदंड हो

पीएम ने कहा कि जो बुरा हुआ है या बुरा करते हैं, उन्हें अलग-थलग करें. न्यायिक प्रक्रिया के तहत जो कुछ भी हो सकता है, वो करें, लेकिन एक घटना के लिए सबको कठघरे में खड़ा कर राजनीति तो कर लेंगे पर स्थितियों को सुधार नहीं पाएंगे. वहां भी सज्जनों का भंडार है, वे भी देश के नागरिक हैं. अपराध होने पर उचित रास्ता कानून और न्याय का है. संविधान और कानून- व्यवस्था सक्षम है. इसका उपाय कानून और न्यायिक प्रक्रिया से जितना कर सकते हैं करें. इससे पीछे नहीं हटना चाहिए. हिंसा की घटना चाहे वह झारखंड, पश्चिम बंगाल या केरल की हो. सबके लिए एक मापदंड हो. इस पर सभी दल एक हो. राजनीतिक स्कोर के लिए बहुत से क्षेत्र हैं.

बाइक चोरी के आरोप में पिटाई 

बता दें कि 17 जून की रात को मृतक तबरेज अंसारी जमशेदपुर स्थित अपने फुआ के घर से सराईकेला के खरसावां थानाक्षेत्र स्थित अपने गांव कदमडीहा लौट रहा था. इसी दौरान धातकीडीह गांव में ग्रामीणों ने मोटरसाइकिल चोरी के आरोप में उसे पकड़ लिया और रात भर बांधकर पिटाई की. इसके बाद लोगों ने अगले दिन सुबह उसे पुलिस के हवाले कर दिया. पुलिस ने पहले उसका इलाज सदर अस्पताल में कराया, फिर शाम को जेल भेज दिया.

सदर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत

22 जून की सुबह तबरेज को जेल से गंभीर हालत में सदर अस्पताल लाया गया, जहां उसकी मौत हो गई. मृतक के परिजनों ने उसके जिंदा होने का दावा कर उसे रेफर करने की मांग की जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने उसे जमशेदपुर के टीएमएच अस्पताल रेफर कर दिया. वहां भी डॉक्टरों ने तबरेज को मृत करार दिया. यहां से शव को वापस सराईकेला लाकर उसका पोस्टमॉर्टम कराया गया.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत के कारणों का नहीं चला पता

मंगलवार को मृतक तबरेज की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई. हालांकि, इसमें मौत के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चला. अब बिसरा जांच में इसका खुलासा होगा. अब तक इस मामले में 11 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. एसआईटी घटना की जांच कर रही है. इधर, रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर जनहित याचिका दायर की गई. इसमें सीबीआई जांच की मांग की गई है. अब तक सूबे में 18 मॉब लिंचिंग के मामले हुए हैं.
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