रांची। विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़े झारखंड में एक बार फिर विपक्षी महागठबंधन संकट में है। जितने दल, उतनी बातें। या यूं कहें सबकी अपनी डफली अपना राग। मोटे तौर पर स्थिति लोकसभा चुनाव की तरह ही पेचीदा दिख रहा है। अब तक की जानकारी के मुताबिक भाजपा विरोधी वोटों का बिखराव रोकने के नाम पर महागठबंधन की बात लगभग सभी विपक्षी पार्टियों में हो रही है, लेकिन कोई भी इसके स्वरूप पर चर्चा करने को आगे नहीं आ रहा। झारखंड की 81 सीटों में से झामुमो जहां 45 सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी कर रहा है, वहीं कांग्रेस किसी भी सूरत में 30 सीटों से कम पर मानने को तैयार नहीं दिख रही।
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी भी महागठबंधन के नाम पर असहज दिख रहे हैं। वे झाविमो की ओर से 20 सीटों की दावेदारी कर रहे हैं। इधर लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद के नेता बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने पहले ही 10 से 12 सीटें मांगकर महागठबंधन की राह में टांग अड़ा दी है। राजद के प्रदेश अध्यक्ष अभय कुमार सिंह महागठबंधन में चुनाव लड़ने की हिमायत तो कर रहे हैं, लेकिन स्वाभिमान से समझौता नहीं करने का दम भी भर रहे हैं।
झारखंड मुक्ति मोर्चा की चुनावी तैयारी तेज
झारखंड में विधानसभा चुनाव के लिए पूरे दमखम से तैयारियों में जुटी सत्तारुढ़ भाजपा के खिलाफ अभी मैदान में झारखंड मुक्ति मोर्चा ही नजर आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुआई में सभी 24 जिलों में अभी बदलाव यात्रा चल रही है। इस बीच हेमंत ने मुख्यमंत्री रघुवर दास पर सख्ती दिखाते हुए उन्हें कानूनी नोटिस भी भेजा है। इसके जरिये हेमंत भाजपा विरोधी वोटरों को यह संदेश देना चाहते हैं कि झामुमो में ही भाजपा की मुखालफत की पूरी क्षमता है। इस बीच गाहे-बगाहे उनकी नेतागिरी को खारिज करने से झामुमो भी विपक्षी महागठबंधन को लेकर बहुत आश्वस्त नहीं दिख रहा है। ऐसे में संभावना यह है कि झामुमो हर हाल में 45 सीओं के दावे पर अड़ा रहेगा।



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