आदिवासियों को रिझाने के तमाम कोशिशों के बावजूद पत्थलगड़ी व भूमि अधिग्रहण बिल जैसे कई मुद्दे भाजपा के सामने चुनौती बनकर खड़े हैं. इन मुद्दों पर एक तरफ विपक्ष का निशाना तो दूसरी ओर पार्टी के अंदर की रंजिशें कहीं न कहीं भाजपा की परेशानी को बढ़ा रही है. पूरी स्थिति के बीच 2019 की चुनावी नैया पार लगाने को लेकर पार्टी जोरशोर से जुटी हुई है. पर, कहीं न कहीं इन विषयों से पार पाने की कोई पुख्ता रणनीति भाजपा के सामने नजर नहीं आ रही है. पार्टी के बड़े नेता भी इन सवालों से पल्ला झाड़ इसे सरकार का मुद्दा बता रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा भी कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए.

सरायकेला के परिसदन सभागार में आयोजित सदस्यता अभियान की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने पत्थलगड़ी व भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर किए जा रहे विरोध पर पूछे गये सवाल के जवाब में कहा कि यह सरकार से जुड़ा मसला है. इसको लेकर सरकार के लोग ही बेहतर बता सकते हैं. उन्होंने कहा कि वे लोग संगठन के विस्तार व मजबूती को लेकर लगे हुए हैं. हालांकि उन्होंने कहा कि इन विषयों पर बेहतर निष्कर्ष निकले यह संगठन चाहती है.

आज रविवार को नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने तथा पुराने कार्यकर्ताओं को अपने साथ बनाए रखने के संकल्पों को लेकर सदस्यता अभियान को लेकर बैठक हुई. इसमें आगामी तीन से पांच जुलाई तक बूथ स्तर पर अभियान चलाकर कार्यकर्ताओं को जोड़ने को लेकर रणनीति बनाई गई. इस मौके पर मौजूद पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, राज्य अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष अशोक षाड़ंगी, आदित्यपुर नगर निगम के मेयर विनोद श्रीवास्तव जैसे कई भाजपा के दिग्गज नेताओं ने कार्यकर्ताओं में जोश भरकर संगठन के विस्तार को जन जन तक पहुंचाने का आह्वान किया.
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