झारखंड में ना तो अवैध शराब के कारोबार और ना ही इससे होने वाली मौतों पर लगाम लग पा रही है. रांची में जहरीली शराब से हुई मौत के मामले की जांच अभी पूरी भी नहीं हुई कि सिमडेगा में जहरीली हड़िया पीकर आधा दर्जन से अधिक लोग काल के गाल में समा गये. इससे एक बार फिर सूबे में चल रहे शराब के काले कारोबार और पुलिस प्रशासन के प्रयास को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
सूबे में शराब के काला कारोबार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आये दिन राजधानी रांची समेत विभिन्न जिलों में उत्पाद विभाग और जिला पुलिस की कार्रवाई शराब के अवैध कारोबारियों के खिलाफ जारी है. शराब की अवैध फैक्ट्री और गोदामों में छापेमारी हो रही है, लेकिन अवैध कारोबार पर रोक नहीं लग पा रही. नतीजा आये दिन जहरीली शराब के कारण लोग अपनी जान गवां रहे हैं. ताजा मामला सिमडेगा के
ठेठाई टांगर से जुड़ा है, जहां जहरीली हड़िया पीने से 8 लोगों की मौत हो गयी. विपक्ष इस घटना को सरकार की लापारवाही करार दे रहा है.
दूसरी ओर राज्य पुलिस की शराब के अवैध कारोबार पर अलग दलील है. एडीजी आरके मल्लिक की माने तो सूचना के आधार पर पुलिस उत्पाद विभाग के साथ मिलकर कार्रवाई करती है. लेकिन कार्रवाई के बाद भी कुकुरमुत्ते की तरह हर दिन एक नया अवैध शराब फैक्ट्री कैसे अस्तित्व में आ रही है, इस सवाल का पुलिस के पा स्पष्ट जवाब नहीं है.
गौरतलब है कि पिछले वर्ष राजधानी रांची के डोरंडा इलाके में जहरीली शराब पीने के कारण दर्जनभर लोगों की मौत हो गयी थी. उनमें कुछ जैप के भी जवान थे. बावजूद इसके ना तो इस धंधे में शामिल सभी अपराधकर्मी पकड़े गये हैं और ना ही शराब के अवैध कारोबार पर रोक लग पायी है.



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